नौजवान भारत सभा द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी सदस्यता अभियान के तहत 23 दिसम्बर को नौभास की मुम्बई इकाई में नए साथियों को सदस्यता दी गयी। साथ ही पूर्व सदस्यों ने अपनी सदस्यता फिर से ली। नए साथियों ने, जो नौभास की गतिविधियों में शामिल होते रहे हैं, अपनी पहलकदमी और संकल्प को आगे बढ़ाते हुए नौभास की सदस्यता ली और क्रान्तिकारियों के विचारों को लोगों तक ले जाने और उनके सपनों के समाज को हकीकत में बदलने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध किया।
नौजवान भारत सभा भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश औपनिवेशिक गुलामी और शोषण-उत्पीड़न के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए बनाया गया एक क्रान्तिकारी संगठन था। यह संगठन नौजवानों को जाति, धर्म, भाषा, प्रान्त, लिंग आदि के आधार पर बाँटकर सत्ताधारी वर्ग की सेवा में लगाने के बजाय नौजवानों को अन्याय के ख़िलाफ़ और मुक्ति के लिए लड़ने की क्रान्तिकारी साहस देता था और कुर्बानी और सृजन की काबिलियत को मानता था।
आज जिस तरह पूँजी की सेवा में लगी फ़ासीवादी प्रतिक्रियावादी ताकतों का कहर और बर्बरता और भी असहनीय और अजेय होता जा रहा है, जब बेरोजगारी भयंकर तरह से बढ़ रही है और शिक्षा को एक बिकाऊ माल बना दिया गया है जिसकी वजह से देश के युवा हताशा और निराशा में खुदकुशी कर रहे हैं या प्रतिक्रिया के गड्ढे में जा गिर रहे हैं, ऐसे में नए सिरे से, एक सही समझदारी और दिशा पर नौजवानों को संगठित करने और उन्हें एक शोषणमुक्त और मानवीय समाज के लिए पूँजीवादी-साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष का हिस्सा बनने के लिए हम आगे बढ़ते रहेंगे।
