‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन‘ के सदस्य और क्रान्तिकारी शिव वर्मा के स्मृति दिवस पर (9 फरवरी 1904 – 10 जनवरी 1997)

‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन‘ के सदस्य और क्रान्तिकारी शिव वर्मा के स्मृति दिवस पर (9 फरवरी 1904 – 10 जनवरी 1997) हरदोई में जन्में शिव वर्मा भारत के क्रान्तिकारी आन्दोलन को एक ऐतिहासिक मोड़ देने वाले क्रान्तिकारी थे। वे शहीद-ए-आज़म भगत सिंह,भगवतीचरण वोहरा, विजयकुमार सिन्हा, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त आदि के साथी और एक गम्भीर चिन्तनशील प्रकृति के क्रान्तिकारी थे। 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने असहयोग आन्दोलन में अपने आपको झोंक दिया। ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में शिव वर्मा का नाम ‘प्रभात’ था। सहारनपुर बम काण्ड, लाहौर षड्यंत्र काण्ड जैसे चर्चित क्रान्तिकारी मामलों में अभियुक्त रहे और उन्होंने कई साल काला पानी के कैदखाने में काटे। स्वतन्त्रता मिलने के बाद भी वे कई बार जेल गए। आज़ादी के बाद भी शिव वर्मा ने एक समतामूलक न्याय पर आधारित समाज का सपना कभी नहीं छोड़ा और अन्तिम साँस तक वे भारत के क्रान्तिकारी आन्दोलन पर विचार विमर्श करने में लगे रहे। 1963 में क्रान्तिकारी साथियों की कहानी के तौर पर ‘संस्मृतियाँ’ लिखीं। इस प्रख्यात पुस्तक ने पूरी दुनिया के सामने भगत सिंह और उनके क्रान्तिकारी साथियों के जीवन और उनके संघर्षों से परिचित कराया। मार्क्सवाद से लोगों को अवगत कराने के लिए उन्होंने ‘मार्क्सवादी परिचय माला’ की श्रृंखला लिखी। नौजवान भारत सभा क्रान्तिकारी चिन्तक शिव वर्मा को क्रान्तिकारी सलाम पेश करता है।

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