नौजवान भारत सभा, मानखुर्द मुम्बई में शुरू की गई रंगों से भरी ‘कला और कारीगारी’ की कक्षा

 

 

 

 

 

 

मुम्बई के मानखुर्द- गोवंडी इलाके में नौजवान भारत सभा द्वारा संचालित ‘शहीद राजगुरु शिक्षा सहायता केन्द्र’ में अब हर हफ्ते बच्चों के लिए ‘कला कक्षा’ की शुरुआत की गई है। कला केवल रंग और रेखाएँ नहीं होती, बल्कि दुनिया को और बारीकी से और नजदीक से जानने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। चित्रकारी की कक्षा में बच्चें कल्पना को उड़ान देते हुए, दुनिया की तस्वीर को कागज़ पर उतारते है। हर हफ्ते कला के अलग-अलग रूप, इतिहास और कलाकारों की जीवनियों पर चर्चा होती है। बच्चें काफी उत्साह के साथ अपने ‘रंगों का पिटारा’ लेकर कोरे काग़ज़ पर अपनी अंदरूनी दुनिया का नक्शा बनाने में जुट जाते हैं।

आज जब स्कूलों में पढ़ने का मकसद महज पाठ्यक्रम को पूरा करना रह गया है। ऐसे में यह सोचना चाहिए कि इस दमघोटू प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था में, बच्चों की सृजनशीलता और कलात्मकता पर क्या असर पड़ा है? शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और गुणवत्ता की कमी की वजह से मुम्बई के मानखुर्द- गोवंडी जैसी मज़दूर बस्तियों के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती है । कला, साहित्य, क्राफ्ट, संगीत जैसे विषय को बड़े- बड़े निज़ी स्कूलों में अलग से पढ़ाया जाता है, वहीं सरकारी स्कूलों में इतिहास और भूगोल जैसे विषय तक के लिए शिक्षकों की कमी हैं। कला और संगीत पढ़ाना तो दूर की बात है। वहीं एक बहुत बड़ी आबादी को शिक्षा छोड़ कर अपने पेट भरने के बारे में सोचना पड़ता है। स्कूल- कॉलेजों की फीस भरें या घर पर दो वक्त की रोटी लाएँ, इस वजह से बहुत से बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है। आम मेहनतकश आबादी को बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी हर जगह ठोकर खानी पड़ती है।

वसीली सुखोम्लीन्स्की अपनी किताब ‘मेरा हृदय बच्चों के लिए’ में अपने बाल-शिक्षा के अभूतपूर्व अनुभवों को पेश करते हुए कहते हैं कि, “पढ़ना-लिखना सिखाने का काम चित्रकारी के साथ जुड़ा होना चाहिए।… बच्चे अपने चारों ओर के संसार से किसी एक चीज़ को केवल काग़ज़ पर उतारते नहीं हैं, बल्कि इस संसार में जीते हैं, वे इस संसार में प्रवेश करके सौंदर्य का सृजन करते हैं और इस सौंदर्य का रसपान करते हैं।”

नौजवान भारत सभा अपील करता है कि आप नौभास द्वारा आयोजित गतिविधियों में शामिल हो और इसके लिए आर्थिक सहयोग भी करें।

संपर्क : 7667230795
Gpay : shashanksaurav1995-2@okicici

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