शहीद भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत दिवस (23 मार्च) के अवसर पर मुम्बई में नौजवान भारत सभा की तरफ़ से ‘शहीद स्मृति संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है।
मानखुर्द-गोवंडी, मुम्बई की मज़दूर बस्तियों व अन्य इलाकों में पुस्तक प्रदर्शनी, फिल्म स्क्रीनिंग, प्रचार अभियान आदि के माध्यम से नौजवानों और आम मेहनतकश आबादी के बीच क्रान्तिकारियों की विरासत को लेकर जाने का काम किया जा रहा है। कल मानखुर्द के लाल्लूभाई कंपाउंड के पास पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें युवाओं ने क्रान्तिकारियों की किताबों के बारे में जानने की इच्छा जताई। कई लोगों ने किताबें भी लीं और अपने सम्पर्क भी साझा किये। आज इस मुनाफा-केन्द्रित पूँजीवादी व्यवस्था में महँगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी, अशिक्षा, कुपोषण, असमानता और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं के कारण नौजवान व आम मेहनतकश आबादी को बेहद ख़राब हालात में जीने को मज़बूर होना पड़ रहा है। यहाँ तक कि उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। ऐसे में महँगाई और बेरोज़गारी जैसे हमारे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए संघ परिवार के विभिन्न प्रतिक्रियावादी संगठन साम्प्रदायिक उन्माद, जाति, धर्म, भाषा और प्रान्त के नाम पर लोगों को आपस में लड़ा रहे हैं। अगर मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ की असली हकीकत देखें तो रोज़गार सृजन की तमाम सम्भावनाएँ होने के बावजूद आज करोड़ों युवा अपनी चप्पलें घिसटने को मज़बूर हैं। शिक्षा को बिकाऊ माल बना दिया गया है, सार्वजनिक सेवाओं के बजट में कटौती की जा रही है। स्त्री-विरोधी अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और जनता के अधिकारों को कुचला जा रहा है। दोस्तों, नौजवान भारत सभा शहीद क्रान्तिकारियों के सपनों का भारत बनाने के लिए देश भर के नौजवानों को संगठित करके वर्तमान मानवद्रोही पूँजीवादी व्यवस्था को हटाकर एक समतामूलक व्यवस्था की स्थापना करने के लिए संकल्पबद्ध है। ‘शहीद स्मृति संकल्प अभियान’ क्रान्तिकारियों की विरासत को पुनर्जागृत करने और इसे आगे बढ़ाने के संकल्प का प्रतीक है। आज युवाओं और नौजवानों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने क्रान्तिकारियों के संघर्ष को समझें, इसे हर बस्ती, मोहल्ले, कारखाने और जन-जन तक पहुँचाएँ, और शहीदों के सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें। इंकलाब ज़िन्दाबाद!
