नौजवान भारत सभा के सदस्यों द्वारा टाटा नगर (मुम्बई) में जन सहयोग के दम पर सामूहिक रसोई एवं फ़ूड पैकेट्स का वितरण जारी है।

लॉक डाउन को 1 महीने से ज्यादा का वक़्त बीत चुका है और मुम्बई, सूरत, दिल्ली और अन्य इलाकों में प्रवासी मज़दूरों की हालात बेहद खराब है। वह कई बार सड़को पर उतर चुके है, जिसकी वजह से सरकारों को मज़बूर होकर ट्रेनों और बसों की सेवा देनी पड़ी। मगर यहां भी इसका खर्चा आम मज़दूर- मेहनतकशों से लिया जा रहा है।उन मज़दूर से जो पहले ही लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी से गुजर रहे है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री तो इस मुद्दे पर लगातार यु टर्न ले रहे कभी श्रमिक स्पेशल ट्रैन को जनता के दवाब में चलाया जाता है , फिर धन्नासेठों के चलते कैंसिल कर दिया जाता है। फिर मज़दूरों के दवाब में चालू किया जाता है। मुम्बई में भी एक बड़ी प्रवासी मज़दूरों की आबादी अपने घर जाने की कोशिश कर रही है।
मुम्बई में मज़दूर भिवंडी, कल्याण से पैदल ही अपने घर को निकल रहे है। जिन्हें वाशी पुल और बॉर्डर से वापस कर दिया जा रहा है। पुलिस स्टेशन और फोटोकॉपी की दुकानों के बाहर प्रवासी मज़दूर फॉर्म लिए खड़ी है। यहां भी जब उन्हें कोई घर जाने की राह नही मिलती , तब 3,000 4,000 दे कर ट्रक से जाने का रास्ता पता चलता है। इन सब के बीच अभी भी मज़दूर मेहनतकशों की एक बड़ी आबादी है , जो अभी भी इस लॉक डाउन में बिना राशन के उन्ही परिस्थितियों में जीने को मज़बूर है।
नौजवान भारत सभा, मुम्बई के सदस्य गोवंडी-मानखुर्द के मेहनतकशों के बीच 26 मार्च से फ़ूड पैकेट्स बांटने का काम कर रहे है। अभी इसके लिए सामूहिक रसोई शुरू है।

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