नौजवान भारत सभा, मुम्बई द्वारा संचालित शिक्षा सहायता केन्द्र में बच्चों के बीच प्रसिद्ध व्यंगकार हरिशंकर परसाई के 100वें जन्म दिवस के अवसर पर उनका जीवन परिचय दिया गया और उनके प्रसिद्ध व्यंग कथा – “इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर” का पाठ किया गया। बच्चों ने काफी उत्साह और ग़ौर से पूरी कहानी सुनी।
परसाई की लेखन पद्धति पर बात करते हुए साथी संजीव ने कहा कि, “परसाई ने समाज में व्याप्त हर उस बुराई, भ्रष्टाचार और अनैतिक चीजों के बारे में लिखा जो आम मेहनतकश जनता के लिए अहितकर था।” वे इस तरह लिखते थे कि शासक वर्ग और उनकी जमात के झूठ और प्रपंच को उघाड़कर रख देते थे। उनकी भाषा की संरचना और उनका कौशल शासक वर्ग पर तीखा प्रहार करता है और आम जनता को सीख के साथ आनन्द भी देता है। आज के दौर में हरिशंकर परसाई जैसे लेखक बहुत ज्यादा प्रासंगिक हैं और उन्हें पढ़ा जाना चाहिए।
