अगर धरा पर रंग न होते
अगर धरा पर रंग न होते
श्वेत – श्याम लगती यह दुनिया
लगती बड़ी अजीब तितलियां
रंगहीन वन- उपवन होते
अगर धरा पर रंग न होते
अगर बिना रंगों के सजता
कैसा इन्द्रधनुष फिर लगता
रंग-बिरंगे वस्त्र न होते
अगर धरा पर रंग न होते
दिवाली की रंग रंगोली
होती रंग बिन कैसी होली
रंगे जीव – विहाग न होते
अगर धरा पर रंग न होते
चित्रकार की कला न खिलती
मूर्ति रंग बिन नहीं निखरती
प्रकृति प्रेम तब संग न होते
अगर धरा पर रंग न हो
– अनिल कुमार कश्यप
नौजवान भारत सभा, मुम्बई की टीम ने गोवंडी- मानखुर्द के टाटा नगर इलाके में बच्चों के बीच कोंपल शिक्षा मंडल की शुरुआत की गई। जिसमें बीते रविवार 19 जुलाई 2020 को बच्चों के बीच कोंपल की दो कहानी
1.लालच ने सबको ठगा
2.तरकीब खेल की
और कविता ‘अगर धरा पर रंग न होते’ पढ़ी। बच्चों ने पढ़ने के बाद मिलकर खूब डांस और मज़ा किया। बच्चों ने इसे निरंतर जारी रखने की बात कही। बच्चों ने आगे मिलकर निर्णय लिया कि वो अपनी पॉकेट मनी से पैसे बचा कर यहां एक बच्चों कि लाइब्रेरी शुरू करेंगे। जिसमें वो मिल बांटकर किताबें पढ़ेंगे।
