नौजवान भारत सभा द्वारा 15 अगस्त “आजादी” के 75वें साल के अवसर पर *आजादी का (अ) मृत महोत्सव* आर्टिकल पढ़ा गया व उस पर परिचर्चा आयोजित की गई।

चर्चा के दौरान बात रखते हुए कहा गया कि एक तरफ तो बेरोजगारी, भुखमरी और अशिक्षा के चलते आम जनता की कमर टूट गई है। आज देश में 30 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगारी के चलते चप्पलें घिसने को मजबूर है और वही इससे हताश निराश युवा आबादी दिशाहीन होकर नशे के शिकार हो रहे है ,यहां तक की आत्महत्या तक करने को मजबूर है। सुप्रीत ने समाज में बढ़ती असमानता पर बात करते हुए कहा कि आज देश के बड़े बड़े पूंजीपति और धन्नासेठ अडानी, अंबानी, टाटा, बिरला की संपत्ति में दिन दूनी रात चौगुनी गति से वृद्धि हुई है।वही दूसरी तरफ आज 80 फीसदी जनता नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। कोरोना काल में फासीवादी मोदी सरकार द्वारा अनियोजित लॉकडाउन की नीतियों की वजह से मज़दूरों को सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया था।
प्रज्ञा ने महिलाओं की आजादी पर बात रखते हुए कहा कि हर दिन महिलाओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। जिसके पीछे का कारण है कि महिलाओं को पूंजीवादी व्यवस्था में उपभोग की वस्तु की तरह पेश किया जाता है। साथ- साथ यह तो सबको पता है कि कठुआ,उन्नाव से लेकर हाल ही में बिल्किस बानो की घटना तक में, यही पता चलता है कि मौजुदा सरकार में बलात्कारियों को संरक्षण दिया जाता है। जिससे फासीवादी मोदी सरकार का ‘चाल चरित्र और चेहरा’ सबके सामने उजागर हो रहा है। जीनी ने बताया कि आज बड़े बड़े हाइवे, मेट्रो, बुलेट ट्रेन, मंहगी कारें अमीरजादों के लिए तो हैं, पर आम मेहनतकश जनता बसों की लंबी कतारों में इंतजार करते हुए, खराब सड़कों के धक्के खाने को मजबूर है।
रेशमा ने बताया कि वो सुबह से आस पास झंडो को लहराते हुए देख रहीं है, हर तरफ आजादी का शोर है ,मगर दूसरी तरफ आज समाज में इतनी असमानता है, गरीबी है, बेरोजगारी है, मंहगाई है, ऐसे में यह कैसी आज़ादी है। सुलेखा व प्रवलिका ने कहा कि लड़कियों को घर से अकेले निकलने पर समाज और घर द्वारा सवाल उठाया जाता है। शशांक ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बस्ती में महिलाओं से बात करने पर उन्होंने बताया कि आज तमाम नेता और उनके चमचे घर- घर झंडा देने आ रहे हैं, पर जब हमारी बस्तियों में पानी नहीं आता है, बारिश में नाले का पानी भरकर घरों में अंदर आ जाता है, तब यह नेता मंत्री लोग कहां रहते हैं।
लालकिले से प्राचीर से मोदी ने अपने भाषण में “प्रण लेता हूं “की जगह “प्राण लेता हूं” बोला, जिस पर संजीव ने बात रखते हुए कहा कि वैसे मोदी सरकार दरअसल आम जनता के प्राण ही ले रही है। कभी जी एस टी लगाकर, तो कभी गैस सिलेंडर-तेल के दाम बढ़ाकर, और तो और कभी हिंदू मुस्लिम के नाम पर दंगे भड़काकर हमारे प्राण ही तो ले रही है, यह फासीवादी मोदी सरकार।
अंत में शहीद ए आजम भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, आज़ाद और क्रान्तिकारी साथियों को याद करते हुए, उनकी क्रांतिकारी विरासत से अवगत कराया गया। उनके द्वारा बनाए गए नौजवान भारत सभा के बारे में बात की गई। भगत सिंह और उनके साथियों के लिए आज़ाद भारत का मतलब था, एक न्यायप्रिय और समतामूलक समाज की स्थापना, जिसका सपना आज भी अधूरा है। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के ठीक 2 दिन पहले ही राजस्थान के एक स्कूल में 9 साल के दलित बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने तथाकथित उच्च जाति के शिक्षक के मटके से पानी पी लिया था। यह आज़ाद भारत के लिए एक शर्मनाक घटना है।
अंत में भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा देखे गए आजादी के सपनों के समाज, यानी कि एक ऐसा समाज जहां पर इंसान द्वारा इंसान का शोषण ना हो और गरीबी भुखमरी बेरोजगारी का नामोनिशान खत्म हो जाए, इस पर बात की गई।
चर्चा में संजू प्रज्ञा शारोन सुप्रीत बबन नाजमीन शशांक विकास सुप्रिया ललिता आशय गीता सीमा अर्जुन अभिरूप आदि शामिल रहे।

Related posts

Leave a Comment

seventeen + 15 =