“पर्चा लीक घोटाला और शिक्षा व्यवस्था”

दिनाँक 23 जून 2024
देशभर के परीक्षाओं में हो रही धाँधली और पर्चा लीक के मुद्दे पर नौजवान भारत सभा, मुम्बई द्वारा “पर्चा लीक घोटाला और शिक्षा व्यवस्था” इस विषय पर परिचर्चा सत्र आयोजित किया गया। परिचर्चा में प्रतियोगी परीक्षाओं में पर्चा लीक होने, परीक्षा केन्द्र पर होते भ्रष्टाचार, परिणामों में हो रही धाँधली और कुल मिलाकर आज की शिक्षा व्यवस्था के बारे में बातचीत हुई।
साथी शशांक ने सबसे पहले हालिया दिनों में NEET UG, UGC-NET, CSIR-UGC-NET और फिर NEET PG की परीक्षाओं में हुई धाँधली और पर्चा लीक के मुद्दे पर बात रखी। उन्होंने बताया कि NEET की परीक्षा में हुए पर्चा लीक और परिणामों में हुई धाँधली का मामला शान्त भी नहीं हुआ था कि UGC-NET, CSIR-UGC-NET और NEET PG के पर्चा लीक होने की खबरें सामने आ गईं और तीनों परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया। NTA और मोदी सरकार ने 33 लाख विद्यार्थियों का जीवन अनिश्चितता और अंधकार में ढकेल दिया है। शुरुआत में NTA ने धाँधली और पर्चा लीक के सभी आरोपों को खारिज कर दिया था लेकिन जैसे- जैसे तथ्य सामने आने लगे वैसे ही NTA ने स्पष्टीकरण देना शुरू कर दिया। पिछले 7 सालों में 80 से भी ज़्यादा पेपर लीक होने की घटनाएँ हुई हैं। इससे अब तक 17 करोड़ से ज़्यादा छात्रों की ज़िन्दगी प्रभावित हुई है।
आगे साथी शशांक ने बताया कि परीक्षाओं में हो रही धाँधली और भ्रष्टाचार सिर्फ एक लक्षण है। इसकी जड़ें आज की मुनाफा केन्द्रित पूँजीवादी व्यवस्था में है जिसने अन्य सभी चीज़ों की तरह शिक्षा को भी एक बाजारू माल बना दिया है। जब शिक्षा खरीदने और बेचने वाली वस्तु बन जायेगी तब अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सिर्फ उन्ही को प्राप्त होगी जिनके पास ज्यादा पैसा है।
इस पर उपस्थित सभी साथियों ने सहमति दिखाई और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। रेश्मा ने बताया कि सरकारी कॉलेजों में सीटों की कमी और निजी कॉलेजों में लाखों रुपए की फीस होने के कारण उनके जैसे लाखों विद्यार्थियों के सपनों को भ्रूण में ही मार दिया जाता है। हैदर ने कहा कि आज सरकारी स्कूल और कॉलेज लगातार खत्म हो रहे हैं और शिक्षा का निजीकरण तेज़ी से आगे बढ़ता जा रहा है।
धनंजय ने बताया कि मोदी सरकार द्वारा 2020 में लायी गयी नयी शिक्षा नीति आने के बाद से शिक्षा पर हो रहे हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इस नीति के द्वारा मोदी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था के बाजारीकरण, केन्द्रीकरण और साम्प्रदायिकीकरण पर ज़ोर दिया है। इसके पीछे का मक़सद यह है कि आम घरों से आने वाले छात्र उच्च शिक्षा तक न पहुँच पाएँ और जो छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर भी लें वह ऐसे रोबोट बन जाएँ जो समाज में मौजूद शोषण और अन्याय अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ न उठाएँ।
साथी प्रज्ञा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की लिए तैयारी कर रहे आम घरों से आने वाले छात्रों के जीवन के बारे में अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि अपने घरों से मीलों दूर पुणे, दिल्ली, पटना, कोटा, इलाहबाद, हैदराबाद जैसे शहरों में लाखों की संख्या में छात्र 10×10 के कमरों में रहने के लिए मजबूर होते हैं। माँ बाप की मेहनत की कमाई के पैसों से जैसे-तैसे अपना गुज़ारा कर दिन रात लगन से पढ़ाई करते हैं और जब परीक्षा और परिणाम का दिन आता है तब उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है या परिणामों में धाँधली हुई है। इसके बाद कई छात्र आत्महत्या भी कर लेते हैं। छात्रों नौजवानों के क्रोध को गलत दिशा में भटकाने के लिए उनको यह बता दिया जाता है उनकी असफलता का कारण दूसरे धर्म या जाति के छात्र हैं। सरकार और उनके हित में काम करने वाले संगठन छात्रों नौजवानों को हिन्दू-मुसलमान, सवर्ण-दलित, स्त्री-पुरष, आदि में बाँटने के लिए लगातार प्रयास करते हैं।
आज क्रान्तिकारी छात्र युवा आन्दोलन का सबसे अहम कार्यभार यह है, कि वह ऐसे नौजवानों को संगठित करें। शिक्षा और रोज़गार के बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए इस मुनाफा केन्द्रित पूँजीवादी व्यवस्था के ख़िलाफ़ एक देशव्यापी आन्दोलन खड़ा करें।
परिचर्चा के अन्त में मौजूद साथियों ने परीक्षाओं में हो रही धाँधली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का तय किया। आने वाले दिनों में नौजवान भारत सभा इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनता में प्रचार करने के साथ छात्रों के हर न्यायसंगत आन्दोलन में हिस्सा भी लेगा।
नौजवान भारत सभा आगे भी ऐसी परिचर्चाओं का आयोजन करता रहेगा।
सम्पर्क : 9930095381, 76672 30795

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