शहीद राजगुरु के 116वें जन्मदिवस के अवसर पर नौजवान भारत सभा द्वारा आयोजित की गयी ‘चित्रकला प्रतियोगिता’!

 

 

 

 

 

 

 

 

नौजवान भारत सभा मानखुर्द, मुम्बई की तरफ़ से दिनांँक 25 अगस्त को ‘शहीद राजगुरु शिक्षा सहायता केन्द्र’ के तहत ‘चित्रकला प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के बीच शहीद राजगुरु की क्रान्तिकारी विरासत के बारे में बात करते हुए हुई। बच्चों को उनके संस्मृतियों के ज़रिये उनके जीवन के अनुभव और क्रान्तिकारी उसूलों के बारे में बताया गया।
राजगुरु ने क्रान्तिकारी संगठन हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) के सदस्य के रूप में एक बेहतर समाज बनाने के संघर्ष में सच्चे अर्थों में सक्रिय भूमिका निभायी। मज़दूरों मेहनतकशों का ऐसा समाज जिसमें अमीरी और गरीबी की खाई न हो और एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति द्वारा शोषण असम्भव हो। उन्होंने चन्द्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह के साथ क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लिया। शहीद राजगुरु का बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति प्रतिबद्धता आज भी लोगों को साहस और समर्पण के प्रतीक के रूप में प्रेरित करती है। इसलिए क्रान्तिकारियों की विरासत को नौजवानों और बच्चों के बीच भी पहुँचाना आज बेहद ज़रूरी है।

आज का मुनाफ़ा केन्द्रित समाज लोगों को चूहा दौड़ करने पर इस तरह मज़बूर कर देता है कि हम एक दूसरे को नीचे खींचकर कैसे ऊपर जाएँ यही खयाल दिमाग में दौड़ता रहता है। जॉब में तरक्की, स्कूल में अव्वल नम्बर, प्रतियोगिता में पहला रैंक, असमानता और भेदभाव को और बढ़ावा देने का काम करते हैं। लोग एक दूसरे को और समाज को कैसे गुणात्मक रूप से उन्नत करेंगे इसके बारे में सोचने के अलावा एक दूसरे को कैसे नीचा दिखाएँ यह बात बचपन से ही सिखाया जाता है। मानवीय उन्नति हमेशा सामाजिक होती है। बच्चों से इस सन्दर्भ में बात हुई और काफी बच्चों ने इस पर सहमति जतायी। इस चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन भी इन्ही सिद्धांन्तों को सन्दर्भ में रखते हुए किया गया। बच्चों ने एक दूसरे के साथ बैठकर, अपनी सामग्री को बराबर सब में बाँटकर मिल कर चित्र बनाया और अपने विचारों और कल्पनाओं को एक दूसरे के साथ साझा किया।

बच्चों को इस दुनिया को और नजदीक से देखना सिखाना और उसे कोरे काग़ज़ पर उतारना, समाज के अलग-अलग पहलुओं को कला के ज़रिये सामने लाना यह उद्देश्य ध्यान में रखते हुए प्रतियोगिता में बच्चों को इस विषय पर चित्र बनाने को कहा गया। बच्चों ने काफी उत्सुकता से चित्र बनाए और रंगों के अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया। किसी ने इन्द्रधनुष तो किसी ने अपने विद्यालय का चित्र बनाया। प्रतियोगिता में बच्चों की सहमति से 5 चित्रों को चुना गया और उन्हें बाल त्रैमासिक पत्रिका, ‘कोंपल’ पुरस्कार के रूप में दिया गया। कार्यक्रम के अन्त में बच्चों को एक क्रान्तिकारी रैप सॉन्ग सुनाया गया और नौजवान भारत सभा की गतिविधियों के बारे में भी बताया गया।

नौजवान भारत सभा की तरफ़ से ऐसे ही कार्यक्रम आगे भी आयोजित किये जायेंगे। इनमें आप भी शामिल हों और हमसे जुड़ें!!
नौजवान भारत सभा, मुम्बई
सम्पर्क – 7667230795

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