मुंबई में रूसी क्रांतिकारी पीटर क्रोपोटकिन की किताब ‘नौजवानों से दो बातें’ का सामूहिक अध्ययन चक्र चलाया गया

अध्ययन चक्र के दौरान बात रखी गई कि आज का पूंजीवादी समाज किस तरह से अमीरी और गरीबी की दो भयानक खाई में बंटा हुआ है। एक तरफ ऐशो आराम और भोग विलास में गोते लगाते हुए कुछ चन्द मुट्ठी भर लोग, और वही दूसरी तरफ आम मजदूर मेहनतकश आबादी नर्क से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है। मजदूर मेहनतकश आबादी को दिन -रात हाड़ तोड़ कड़ी मेहनत करने के बावजूद सिर्फ गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और भुखमरी ही मिलती है।
न्यायपालिका, विधायिका ,कानून आदि सभी पर पूंजी की हुकूमत चलती है।इसी तरह मुनाफे पर टिकी व्यवस्था में विज्ञान का विकास भी इस व्यवस्था से बंधा होता हैं। आज भले ही इंसान एक तरफ चांद पर पहुंच गया है। मगर दूसरी तरफ सच्चाई यह भी है कि आज भी सफाई कर्मचारी को गटर में घुस कर सफाई करनी पड़ती है ,और खतरनाक जहरीली गैसों की वजह से जान तक गवानी पड़ती है। ऐसे में आज मुनाफे पर टिकी हुई इस समाज व्यवस्था की असली सच्चाई समझने की जरूरत है। व इसे बदलने के काम को हाथ में लेने की जरूरत है। यदि आपका दिल प्यार से लबरेज है तो इस मुनाफाखोर, मनावद्रोही व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए आगे आना होगा।

Related posts

Leave a Comment

12 + sixteen =