नौजवान भारत सभा द्वारा क्रान्तिकारी बटुकेश्वर दत्त की स्मृति दिवस पर, बच्चों के बीच बटुकेश्वर दत्त का जीवन परिचय दिया गया

क्रान्तिकारी बटुकेश्वर दत्त की विरासत अमर रहें!
अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम!!
नौजवान भारत सभा द्वारा मुम्बई के मानखुर्द-गोवंडी इलाके में संचालित ‘शहीद राजगुरु शिक्षा सहायता केन्द्र’ और ‘कोंपल शिक्षा मण्डल’ में, महान क्रान्तिकारी बटुकेश्वर दत्त की स्मृति दिवस पर, बच्चों के बीच बटुकेश्वर दत्त का जीवन परिचय दिया गया। बच्चों को बताया कि बटुकेश्वर दत्त बंगाल में जन्मे थे। जब वह पढ़ाई करने कानपुर में आए, तो क्रान्तिकारी धारा से परिचित हुए और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़ गए।
8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज सरकार दो काले कानून, ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’ और ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ लाकर मज़दूरों मेहनतकशों को और ज़्यादा लूटने और उनकी आज़ादी पर पाबन्दी लगाने का काम करने वाली थी। तब उसके विरोध में भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली हॉल में बम फेंका था।
एच. एस.आर.ए. की ओर से भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली हॉल में बम फेंककर अंग्रेज हुक्मरानों के कानों में ऐसा धमाका किया जिसकी गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दी। क्योंकि उसी समय अंग्रेज सरकार इन दो काले कानूनों को असेम्बली में पास करने वाली थी।
गिरफ्तारी के बाद भगतसिंह और दत्त को जेल हुई। दो साल बाद भगतसिंह को फाँसी की सजा सुनाई गई और दत्त को आजीवन कारावास की सजा। उन्होंने जेल में कई बार भूख हड़ताल भी किया।
1938 में जेल से छूटने के बाद वे भारत छोड़ो आन्दोलन’ में भी शामिल हुए, लेकिन फिर से जेल में बन्द कर दिए गए।
1947 में मिलने वाली आज़ादी के बाद दत्त जैसे क्रान्तिकारी को दर बदर की ठोकरें खानी पड़ी और आर्थिक तंगी में जीवन बिताया। जीवन के अन्तिम दिनों में सरकार ने उनका इलाज़ भी ठीक से नहीं करवाया। 20 जुलाई 1965 को
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में कैंसर नामक बीमारी के कारण उनका देहान्त हो गया।
दत्त के बारे में बात करने के बाद एच. एस. आर. ए. द्वारा असेम्बली हॉल में बम धमाके के साथ क्रान्तिकारियों ने जिस पर्चे को बाँटा था वह भी पढ़ा गया।
अन्त में बात की गई कि आज भी दत्त जैसे तमाम क्रान्तिकारियों के सपने अधूरे हैं और उन्हें पूरा करने का दायित्व हम जैसे बच्चों, नौजवानों, छात्रों और युवाओं का है।
अमर शहीदों का पैग़ाम,
जारी रखना है संग्राम!

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