हम साहित्‍य को केवल मनबहलाव की वस्‍तु नहीं समझते, हमारी कसौटी पर वही साहित्‍य खरा उतरेगा जिसमें उच्‍च चिन्‍तन हो, स्‍वाधीनता का भाव हो, सौन्‍दर्य का सार हो, सृजन की आत्‍मा हो, जीवन की सच्‍चाइयों का प्रकाश हो– जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाये नहीं, क्‍योंकि अब और ज्‍यादा सोना मृत्‍यु का लक्षण है। प्रेमचन्‍द

हम साहित्‍य को केवल मनबहलाव की वस्‍तु नहीं समझते, हमारी कसौटी पर वही साहित्‍य खरा उतरेगा जिसमें उच्‍च चिन्‍तन हो, स्‍वाधीनता का भाव हो, सौन्‍दर्य का सार हो, सृजन की आत्‍मा हो, जीवन की सच्‍चाइयों का प्रकाश हो– जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाये नहीं, क्‍योंकि अब और ज्‍यादा सोना मृत्‍यु का लक्षण है। प्रेमचन्‍द (साहित्‍य का उद्देश्‍य) #Premchand#progressive#literature#artforsociety#artforchange#creativity#progressiveartist#nbs#youth#bhagatsingh#revolutionaryquotes#legacy

Related posts

Leave a Comment

one × 4 =